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ज़्यादातर प्रकार के कैंसर का इलाज सम्भव है अगर शुरूआती अवस्था में इसका पता चल जाए। इसलिए आम लोगों सलाह दी जाती है कि नियमित रूप से अपनी स्क्रीनिंग करवाएं तथा अपने आहार और व्यायाम का ध्यान रखें।

कैंसर के इलाज में लगने वाला समय रोग की गम्भीरता, लक्षणों और मरीज़ की उम्र पर निर्भर करता है।

आप इस वेबसाईट के ‘नज़दीकी अस्पताल’ सेक्शन में जाकर भारत में मौजूद सभी क्षेत्रीय कैंसर उपचार केन्द्रों के बारे में जानकारी पा सकते हैं।

एनीमिया यानि खून की कमी

भूख में कमी

एकाग्रता, सोच-विचार एवं याददाश्त से जुड़ी समस्याएं

खून बहना

आंतों में रुकावट – गैस्ट्रो इन्टेस्टाइनल आॅब्स्ट्रक्शन

क्लाॅटिंग यानि खून का थक्का जमना

कब्ज़

पानी की कमी/ डीहाइड्रेशन

दांत और मुख का स्वास्थ्य

डायरिया

चबाने में परेशानी

निगलने में परेशानी या डिस्फेज़िया

मुंह सूखना या ज़ैरोस्टोमिया

शरीर में पानी भरना या ईडेमा

थकान

फेफड़ों या (मैलिग्नेन्ट प्ल्यूरल एफयूज़न) के आस पास पानी भरना

पेट में पानी भरना या एस्काईट्स

बाल झड़ना या एलोपेसिया

हैण्ड-फुट सिन्ड्रोम या पाल्मर-प्लान्टर एरिथ्रोडासेसथेसिया

सिर में दर्द

दिल की बीमारियां

पुरुषों में हाॅर्मोनों की कमी

कैल्सियम की अधिकता/ हाइपरकैल्सिमिया

संक्रमण

लिम्फेडेमा

महिलाओं में मीनोपाॅज़/ रजोनिवृत्ति जैसे लक्षण

मनसिक उलझन या डेलिरियम

मुंह सूखना या म्युकोसाइटिस

मतली और उल्टी

तंत्रिका तंत्र के पाश्र्व प्रभाव

न्यूट्रोपेनिया

आॅस्टियोपोरोसिस

दर्द

पैरिफरल न्यूरोपैथी

सांस लेने में परेशानी या डिस्पनिया

त्वचा की समस्याएं

किसी विशेष थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी के लिए त्वचा की प्रतिक्रिया

नींद से जुड़ी समस्याः हाइपरसोम्निया (ज़्यादा नींद आना) या सौम्नोलेन्स सिन्ड्रोम, बुरी सपने आना

नींद से जुड़ी समस्याः इनसोम्निया (नींद न आना)

सुपीरियर वेना कावा सिन्ड्रोम

स्वाद में बदलाव

थ्रोम्बोसाइटोपेनिया

मूत्र असंयम

वज़न बढ़ना

वज़न कम होना

यह कैंसर के प्रकार, रोग की अवस्था तथा मरीज़ के समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है, अगर मरीज़ को समय पर सही उपचार दिया जा रहा है।

अगर इलाज होने के बाद, या ठीक होने के कुछ समय बाद कैंसर के लक्षण फिर से दिखाई दें इसे कैंसर का दोबारा होना कहा जाता है।

दोबारा होने वाला कैंसर उसी स्थान पर हो सकता है जहां यह पहली बार हुआ था या शरीर के किसी अन्य हिस्से में भी हो सकता है। जब कैंसर शरीर के किसी अन्य हिस्से में फैल जाता है तो भी उसे शरीर के उसी अंग के नाम से पुकारा जाता है जहां से इसकी शुरूआत हुई थी।

अगर आप में एक प्रकार के कैंसर का इलाज करने के बाद दोबारा कैंसर होता है तो यह जांच की जाती है कि दूसरी बार हुआ कैंसर पहले जैसा है या किसी नए प्रकार का है।

कैंसर के दोबारा होने की सम्भावना के बारे में अनुमान लगाना मुश्किल है लेकिन कैंसर का इलाज करना मुश्किल होता है और इसके दोबारा होने की सम्भावना ज़्यादा होती है अगरः

  • यह तेज़ी से बढ़ रहा हे।
  • बहुत ज़्यादा अडवान्स्ड स्थिति में हो या शरीर में बहुत ज़्यादा फैल चुका हो।
  • भारत में कैंसर का इलाज विदेशों के समकक्ष है और कई मामलों में विदेशों से बेहतर भी है।
  • क्षेत्रीय कैंसर केन्द्र के बारे में जानकारी के लिए हमारे नज़दीकी अस्पताल’ सेक्शन में जाएं।
  • कैंसर मरीज़ और उसके परिवार के लिए बड़ा आर्थिक बोझ पैदा करता है। इसलिए सलाह दी जाती है कि अगर आप सक्षम हैं तो कैंसर-विशिष्ट बीमा करवाएं, कुछ सरकारी योजनाएं भी हैं जो कैंसर के उपचार के लिए लोगों को मदद करती हैं।
    अधिक जानकारी के लिए विज़िट करें :  www.cancerhelpline.in

यह कैंसर की जैविकी/ बायोलोजी पर निर्भर करता है। एक ही तरह के कैंसर के बढ़ने की गति अलग-अलग हो सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी कितनी तेज़ी से बढ़ रही है।
उदाहरण के लिए कुछ प्रकार के स्तन कैंसर में कोशिकाओं के विभाजित होने की दर बहुत अधिक होती है और कोशिकाएं 30 दिनों में दोगुनी हो जाती हैं। जबकि कुछ अन्य प्रकार के स्तन कैंसर में विभाजन की दर मात्र 1 फीसदी होती है और कोशिकाओं की संख्या दोगुनी होने में एक साल या दो साल भी लग सकते हैं।

उम्मीद हमेशा रहती है। सर्वश्रेष्ठ उपचार के बावजूद कई बार डाॅक्टर बहुत कुछ नहीं कर पाता, लेकिन मरीज़ की इच्छा शक्ति और उम्मीद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए उम्मीद न खोएं। चमत्कार होते हैं।

कैंसर के इलाज के कुछ आम साईड इफेक्ट्स/पाश्र्व प्रभाव हैंः

  • एनीमिया या खून की कमी
  • भूख में कमी
  • खून बहना और ब्रुसिंन (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया)
  • कब्ज
  • डेलिरियम/ कुछ भी बोलना
  • दस्त
  • एडेमा
  • थकान
  • बाल गिरना/ गंजापन (एलोपेसिया)
  • संक्रमण और न्यूट्रोपेनिया
  • लिम्फेडेमा
  • यादयाश्त या एकाग्रता से जुड़ी समस्या
  • मुंह और गले की समस्याएं
  • मतली और उल्टी
  • तंत्रिका की समस्या (पैरिफरल न्यूरोपैथी)
  • दर्द
  • यौन और प्रजनन समस्याएं (पुरुष)
  • यौन और प्रजनन समस्याएं (महिला)
  • त्वचा और नाखुनों में बदलाव
  • नींद की समस्याएं
  • मूत्र और मूत्राशय की समस्याएं

सर्जरी के कारण कैंसर के अन्य हिस्सों में फैलने की सम्भावना बहुत कम होती है। मानक प्रक्रिया के बाद सर्जन विशेष तरीकों का इस्तेमाल करता है। तथा बायोप्सी या ट्यूमर हटाने की सर्जरी के दौरान कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाते हैं।

रेडिएशन और कीमोथैरेपी से कैंसर की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। ये प्रक्रियाएं शरीर की सामान्य कोशिकाओं को भी नष्ट कर देती हैं। रेडिएशन और विशेष प्रकार की कीमोथैरेपी लेने वाले कुछ मरीज़ों में सैकण्डरी मैलिग्नेन्सी पाई गई है। आपसे जुड़े विशेष जोखिम के बारे में जानने के लिए अपने डाॅक्टर से पूछें।

इलाज निदान किए गए ट्यूमर या मैटास्टेसिस के आधार पर आपके डाॅक्टर द्वारा दिए गए सुझाव पर निर्भर करता है। हर तरह के कैंसर के लिए एक ही आकार का इलाज नहीं हो सकता और कुछ मामलों में इलाज की प्रभाविता बढ़ाने के लिए कुछ तरीकों का संयोजन इस्तेमाल किया जाता है। विशेष मरीज़ को सर्वश्रेष्ठ सम्भव इलाज देने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम एक साथ मिलकर काम करती है। इसके लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है।