कैंसर के बारे में 17 तथ्य जो आपको जानने चाहिए

01) रोकथाम

दुनिया भर में विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के कारण होने वाली कम से कम आधी मौतों को रोका जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2012 में दुनिया भर में कैंसर के कारण दो मिलियन लोगों की मृत्यु हुई। इनमें से आधी मौतों को रोका जा सकता था।

02) परिभाषा

कैंसर 100 से ज़्यादा बीमारियों को दिया गया एक नाम है। कैंसर को कभी ‘वेस्टिंग डिजीज़’ यानि बर्बाद कर देने वाला रोग कहा जाता था। कैंसर में शरीर की कुछ असामान्य कोशिकाएं अनियन्त्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं, ये बिना किसी नियन्त्रण के फैलती जाती हैं और अपने सम्पर्क में आने वाली स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती हैं। ज़्यादातर कैंसर ट्युमर के रूप में होते हैं, लेकिन रक्त कैंसर ट्युमर के रूप में नहीं होता। कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।

03) आनुवंशिकी

कैंसर के बहुत कम मामले (5 से 10 फीसदी) आनुवंशिक कारण से जुड़े होते हैं। अगर कोई विशेषज्ञ आपसे कहता है कि ज़्यादातर कैंसर आनुवंशिक हैं तो वह सच नहीं है। हालांकि अनुसंधानों से साफ हो गया है कि ज़्यादातर मरीज़़ों को अपने माता-पिता से कैंसर के अंश नहीं मिलते, लेकिन एक ही परिवार के सदस्यों की आदतें लगभग एक जैसी होती हैं, वे एक जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं और एक जैसे टॉक्सिन्स के सम्पर्क में आते हैं। इस तरह एक परिवार के सदस्यों में कैंसर की सम्भावना बढ़ जाती हे। ऐसे में उचित आहार, व्यायाम, टॉक्सिन्स से दूर रहना परिवार के हर सदस्य के लिए ज़रूरी है।

04) प्रदूषण

पर्यावरणी कारक कैंसर की सम्भावना को बढ़ा सकते हैं। हवा जिसमें हम सांस लेते हैं, पानी जो हम पीते हैं और भोजन जो हम खाते हैं, वह बेहद महत्वपूर्ण है। प्रदूषण, भारी धातुओं की विषाक्तता और यहां तक कि निजी देखभाल एवं घरेलू साफ-सफाई में काम वाले उत्पाद भी आपके शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आपका घर और ऑफिस दो ऐसे स्थान हैं, जहां आप सबसे ज़्यादा समय बिताते हैं। ऐसे में कोशिश कीजिए कि आपके सम्पर्क में आने वाले टॉक्सिन्स यानि विषैले पदार्थ कम से कम हों।

05) धूम्रपान

फेफड़ों के कैंसर के 90 फीसदी से ज़्यादा मामले धूम्रपान के कारण होते हैं और कैंसर के कारण होने वाली 22 फीसदी मौतें धूम्रपान के कारण होने वाले फेफड़ों के कैंसर से होती हैं। तम्बकू का सेवन दुनिया भर में कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। फेफड़ों के कैंसर के मामले में मरीज़ के जीवित रहने की सम्भावना 20 फीसदी से भी कम होती है और अगर आप धूम्रपान करते हैं और साथ ही अपने कार्यस्थल पर भी इन विषाक्त पदार्थों के सम्पर्क में आते हैं तो आपके जीवित रहने की सम्भावना गिरकर 3 फीसदी पर आ जाती है। वास्तव में तम्बाकू उत्पादों के निर्माण में काम आने वाला कार्सिनोजेनिक (कैंसर कारक) रसायन कैंसर का कारण है न कि तम्बाकू खुद इसका कारण है। एक सिगरेट में 69 कार्सिनोजन और 4,000 रसायन होते हैं। दुनिया भर में हर 30 सैकण्ड में एक व्यक्ति की मृत्यु फेफड़ों के कैंसर के कारण होती है…………….. तो समय आ गया है कि आप इस पैराग्राफ को ज़रूर पढ़ें।

06) नींद

पूरी नींद लेना व्यक्ति के लिए बहुत ज़रूरी है- रोज़ाना छह घण्टे से कम नींद कोलन (मलाशय) कैंसर की सम्भावना बढ़ाती है। हाल ही में हुए अनुसंधान दर्शाते हैं कि रात की पारी में काम करने वाले लोगों में कैंसर के अधिक मामले पाए जाते हैं। अपने शरीर को कैंसर से मुक्त रखने केे लिए अच्छी नींद लेना भी बेहद ज़रूरी है

07) बच्चे

दुनिया भर में हर साल 175,000 बच्चों में कैंसर का निदान किया जाता है। कैंसर आज बच्चों के लिए नम्बर 1 जानलेवा रोग बन चुका है। आज कैंसर (और कैंसर के उपचार) के कारण मरने वाले बच्चों की संख्या, प्रसव की जटिलताओं, टाईप 1 डायबिटीज़ और अस्थमा के कारण होने वाली कुल मौतों से अधिक है। कैंसर पीड़ित बच्चों के जीवित रहने की दर में सुधार नहीं आ रहा हे क्योंकि उपचार के पारम्परिक तरीके (कीमो और रेडिएशन) बच्चों के लिए बदतर साबित होते हैं। इसके अलावा हम उपचार के बजाए कारण पर कम ध्यान दे रहे हैं।

08) नाइट्रेट

सॉसेज, हॉट डॉग और बैकन में नाइटेªट होता है। इनमें सोडियम नाइटेªट और पोटेशियम नाइट्राइट होते हैं। नाइट्रेट का इस्तेमाल प्रसंस्कृत मांस को संरक्षित करने और उनका स्वाद बढ़ाने केे लिए किया जाता है। पाचन के दौरान ये नाइटेªट हमारे शरीर के पाचक रसों के साथ क्रिया कर नाइट्राइट में बदल जाते हैं, जिसे कार्सिनोजन कहा जाता है। नाइट्रेट उर्वरकों का इस्तेमाल करने पर रिस कर ज़मीन के पानी में भी चला जाता है, इसलिए हमेशा फिल्टर किया हुआ पानी ही पीना चाहिए।

09) मृत्यु दर

दुनिया भर में हर आठ में से एक मौत कैंसर के कारण होती है। कैंसर से जुड़ा एक दर्दनाक तथ्य यह है कि इसके कारण होने वाली मौतों की संख्या मलेरिया, टीबी और एड्स के कारण होने वाली कुल मौतों से भी अधिक है। कैंसर के कारण होने वाली लगभग 70 फीसदी मौतें निम्न एवं मध्यम आयवर्ग में होती हैं। वर्तमान में दुनिया भर में कैंसर की जंग जीत जुके 33 मिलियन मरीज़ हैं। (निदान के 5 साल के भीतर)

10) महिलाएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार महिलाओं में सबसे ज़्यादा स्तन, कोलोरेक्टल, फेफड़े एवं श्वसन मार्ग, सरवाइकल एवं पेट के कैंसर के नए मामले पाए जाते हैं। जल्दी निदान द्वारा स्तन कैंसर के इलाज की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती है।

11) पुरुष

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर के पुरुषों में फेफड़े एवं श्वसन मार्ग, कोलोरेक्टल, पेट और यकृत कैंसर के नए मामले सबसे ज़्यादा पाए जाते हैं।

12) उम्र

विकसित देशों में कैंसर के 58 फीसदी नए मामलों का निदान 65 साल या अधिक उम्र के लोगों में किया जाता है। विकासशील देेशेां में 40 फीसदी नए मामले 65 साल से अधिक उम्र में पाए जाते हैं।

13) मोटापा

अनुसंधानों से साफ़ हो गया है कि मोटापे के करण कैंसर एवं अन्य रोगों की सम्भावना बढ़ जाती है। इसका असर रोग के उपचार पर भी पड़ता है। एक अध्ययन में पाया गया कि मीनापॉज़ (रजोनिवृत्ति) के बाद स्तन कैंसर के कामयाब उपचार की दर उन महिलाओं में ज़्यादा होती है जिनके शरीर का वज़न सामान्य होता है। इसी तरह प्री-डायबिटीज़ मोटापे के साथ-साथ कैंसर की सम्भावना को भी 15 फीसदी तक बढ़ा देता है।

14) जांच और निदान

अण्डाश्य, फेफड़ों और कोलन (बड़ी आंत) कैंसर के मामले में अक्सर लक्षण तब दिखाई देने लगते हैं जब यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है। ऐसे में कैंसर के समय पर निदान के लिए नियमित स्क्रीनिंग ज़रूरी है।

15) त्वचा

त्वचा का कैंसर-कैंसर का सबसे आम प्रकार है। हर साल त्वचा कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। मुख्यधारा विज्ञान (और सनस्क्रीन उद्योग) इसका कसूरवार धूप को ठहराते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। धूप की उपयुक्त मात्रा शरीर में विटामिन डी बनाने में मदद करती है। (त्वचा में मौजूद कॉलेस्ट्रॉल पराबैंगनी किरणों की मौजूदगी में विटामिन डी बनाता है) रोज़ाना सुबह या दोपहर के अंतिम समय 30 मिनट धूप में रहने से (केवल चेहरा और बाजुएं धूप के सम्पर्क में आएं) शरीर में इस ज़रूरी विटामिन की पर्याप्त मात्रा बन जाती है। हालांकि आपको सनबर्न से अपने आप को बचाना चाहिए। सनस्क्रीन उन किरणों को रोकते हैं जो विटामिन डी बनाने में मदद करती है। साथ ही 90 फीसदी सनस्क्रीन ब्राण्ड्स में ऑक्टाइल मेथॉक्सी सिनामेट ;व्डब्द्ध जैसे रसयन होते हैं जो धूप के सम्पर्क में विषैले पदार्थ बनाते हैं। प्रयोगशाला में किए एक अध्ययन में यह रसायन चूहों की कोशिकाओं को मारने में कामयाब पाया गया। चूंकि सनस्क्रीन सीधे त्वचा पर लगाया जाता है, यह सीधे शरीर की रक्तधारा के माध्यम से कोशिकाओं में अवशोषित हो जाता है।

16) एपॉप्टॉसिस

स्वस्थ कोशिकाओं में ‘अपने आप को मार देने’ का अंतर्निहित निर्देश एपॉप्टॉसिस कहलाता है। आमतौर पर शरीर की कोशिकाओं में एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसके द्वारा वे अपने अंदर मौजूद कमियों को पहचान कर अपने आप को नष्ट कर देती हैं जिससे दूसरी कोशिकाओं को नुकसान न पहुंचे। लेकिन कैंसर कोशिकाओं में यह ऑटोमेटिक प्रक्रिया मौजूद नहीं होती। हालांकि वैज्ञानिक अब तक इसका कारण पता नहीं लगा सके हैं। कैंसर, न्यूरोडीजनरेटिव रोगों तथा दिल की बीमारियों में एपॉप्टॉसिस प्रक्रिया बंद हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि कुछ विशेष खाद्य पदार्थों के कारण कैंसर कोशिकाओं की प्राकृतिक रक्षा की यह क्षमता खत्म हो जाती है।

17) पोषण

आप क्या खाते हैं, यह बहुत अधिक मायने रखता है। कैंसर पैदा करने वाले सबसे आम खाद्य पदार्थ हैं रिफाइन्ड चीनी और आटा, सोडा, माइक्रोवेव पॉपकॉर्न, बीपीए युक्त डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, ग्रिल्ड या प्रसंस्कृत मांस और हाइड्रोजनीकृत तेल। सही खाद्य पदार्थों का चुनाव कैंसर की सम्भावना को कम कर सकता है। जैसे कि रु16 में बताया गया है कुछ विशेष खाद्य पदार्थों के कारण कैंसर कोशिकाओं की प्राकृतिक रक्षा की क्षमता खत्म हो जाती है। हरी चाय, जामुन, हल्दी, अवेकैडो, लहसुन, काली, और यहां तक ​​कि काले चॉकलेट कुछ ऐसे हैं जो कैंसर कोशिकाओं को लक्ष्य और नष्ट करते हैं। आप अंदर से बाहर से कैंसर को रोका और लड़ सकते हैं।

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सूत्रों:

वेरोनिका मैकिलमॉन्ट, पीएचडी, आरडी, खाद्य और पोषण सेवाओं के निदेशक, मेमोरियल स्लोअन-केटरिंग कैंसर सेंटर।
किम जॉर्डन, आरडी, सिएटल कैंसर केयर अलायंस, फ्रेड हचिन्सन कैंसर रिसर्च सेंटर
सारा रफाट, आरडी, वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ, टेक्सास विश्वविद्यालय एम.डी. एंडरसन कैंसर केंद्र।
फ्रेड हचिन्सन कैंसर रिसर्च सेंटर: “कैंसर के बाद पोषण।”
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को: “कैंसर उपचार साइड इफेक्ट्स के लिए आहार,” “कैंसर के लक्षणों के साथ पोषण और कोपरिंग”।
USDA: “कैंसर के साथ लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा।”
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट: “कैंसर के उपचार, खाने की खातिर और खाने की समस्याओं के बारे में आपको क्या पता होना चाहिए।”

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